सोमवार, 29 दिसंबर 2008

वेद ही शिव हैं, शिव ही वेद

दु:स्वप्नदुश्शकुनदुर्गतिदौर्मनस्य,दुर्भिक्षदु‌र्व्यसनदुस्सहदुर्यशांसि।

उत्पाततापविषभीतिमसद्ग्रहार्ति,

व्याधीश्चनाशयतुमेजगतातमीश:॥

जगदीश्वरभगवान शिव मेरे बुरे स्वप्न, बुरे शकुन, बुरी गति, मन की दुष्ट भावना, दुर्भिक्ष, दु‌र्व्यसन, दुस्सह अपयश, उत्पात, संताप, विषभय,दुष्ट ग्रहों की पीडा तथा समस्त रोगों का नाश करें।

वेद: शिव: शिवोवेद:। अर्थात् वेद ही शिव हैं और शिव ही वेद हैं। अर्थात् शिव वेद स्वरूप हैं। यह भी कहा गया है कि वेद नारायण का साक्षात् स्वरूप हैं-वेदो नारायण: साक्षात् स्वयंभूतिरितिसुश्रूम।इसके साथ ही वेद को परमात्मप्रभु का नि:श्वास कहा गया है। वेद के प्रावधान के अनुरूप ही सनातन जगत में अनादि भगवान शिवजी का पूजन अभिषेक, यज्ञ और जप आदि किया जाता है। शिव और रुद्र ब्रह्म के ही पर्यायवाची शब्द हैं। शिव को रुद्र इसलिए कहा जाता है कि यह रुत अर्थात् दुख को विनष्ट कर देते हैं-रुतम दुखमद्रावयति-नाशयतीतिरुद्र:। अर्थात् शिव का अर्थ है कल्याण। इस शरीर में शिव न रहें तो व्यक्ति शव हो जाता है। यही कारण है कि अपने भीतर शिव को जाग्रत करने के लिए ही ॐ नम: शिवायका जाप किया जाता है। मनुष्य का मन विषयलोलुप हो कर अधोगति को प्राप्त न हो और व्यक्ति अपनी चित्तवृत्तियोंको स्वच्छ रख सके, इसके निमित्त रुद्र का अनुष्ठान करना मुख्य और उत्कृष्ट साधन है। यह रुद्रानुष्ठानप्रवृत्ति मार्ग से निवृत्ति मार्ग को प्राप्त कराने में समर्थ है। जो व्यक्ति समुद्र, वन, पर्वत, वृक्षों तथा श्रेष्ठ गुणों से युक्त ऐसी पृथ्वी का दान करता है, जो धन-धान्य, सुवर्ण और औषधियों से युक्त है, उससे भी अधिक पुण्य एक बार में रुद्रीजपएवं रुद्राभिषेक से प्राप्त हो जाता है। इसलिए जो भगवान रुद्र का ध्यान करके रुद्रीका पाठ करता है, वह उसी देह से निश्चित ही रुद्रमयहो जाता है। सोमवारीव्रत श्रावण मास के सभी सोमवार को किया जाता है।

इस समय व्रतों और पूजा का विशेष महत्व है। यह व्रत अत्यंत शुभकारीऔर फलदायीहोता है। श्रावण में इस व्रत को धारण करनेवाले सभी भक्तों पर शिव अपनी विशेष अनुकंपा रखते हैं। सभी मनोकामनाएंपूर्ण होती हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव के अलावा जगज्जननीपार्वती, गणेश जी तथा नंदी जी की पूजा की जानी चाहिए। भगवान शिव की पूजा के लिए आसन पर पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुखबैठ जाएं। फिर पूजन तथा अभिषेक सामग्री जैसे दूध, जल, शहद, घी, गुड, जनेऊ, चंदन, रोली, बेलपत्र,भांग-धतूरा, धूप, दीप से पूजन करना चाहिए। कपूर से आरती करके रात्रि में जागरण करे। इसलिए सोलह सोमवार व्रत कथा का महात्म्यसुनना चाहिए।

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