सोमवार, 9 अगस्त 2010

क्यों रखें सोमवार व्रत?

सावन में सोमवार व्रत रखने का महत्व बताया गया है। सामान्यत: यह शिव उपासना के लिए प्रसिद्ध है। किंतु ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से यह दिन कुण्डली में चंद्र ग्रह के बुरे योग से जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। जानते हैं कैसे चंद्र मानव जीवन और प्रकृति पर असर डालता है और चंद्र के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए सोमवार को चंद्र पूजा और व्रत का महत्व।
हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी सहित अन्य सभी ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हैं। पर चन्द्रमा तो हमारी पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं, क्योंकि वह ग्रह न होकर एक उपग्रह है। यह विज्ञान की बात है। किंतु व्यावहारिक जीवन में भी हम देखते हैं कि चन्द्रमा मानव जीवन के साथ-साथ साथ-साथ पूरे जगत पर ही प्रभाव डालता है। इसका प्रमाण है पूर्णिमा लगती है।
इसलिए ज्योतिष विज्ञान कहता है कि चन्द्रमा हमारी पृथ्वी के सबसे अधिक समीप है और अपनी निकटता के कारण ही हमारे जीवन के हर कार्य व्यवहार पर सबसे अधिक असर डालता है। यही कारण है कि जिन लोगों में जल तत्व की प्रधानता होती है। वह पूर्णिमा के आस-पास अधिक क्रोधित और उद्दण्ड बने रहते हैं। जबकि अमावस्या के आस-पास एकदम शांत और गंभीर देखे जाते हैं। यही कारण है कि खासतौर पर जलतत्व राशि जैसे मीन, कर्क, वृश्चिक वाले स्त्री-पुरुषों को सोमवार का व्रत और चन्द्रदेव का पूजन तो जरुर करना ही चाहिए।
मानसिक शांति, मन की चंचलता को रोकने और दिमाग को संतुलित रखने के लिए तो चन्द्रदेव के निमित्त किए जाने वाला सोमवार का व्रत ही श्रेष्ठ उपाय है। चंद्रदोष शांत के लिए स्फटिक की माला पहनना तथा मोती का धारण करना शुभ होता है।

2 टिप्‍पणियां:

Prabhu Darshan ने कहा…
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Prabhu Darshan ने कहा…


रामभक्त, बजरंगबली, पवन पुत्र, अंजनी पुत्र, ना जाने कितने नामों से पुकारा जाता है हनुमान जी को. हिन्दू धर्म में हनुमान जी को भगवान शिव का ही अवतार माना गया है. लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि भगवान शिव जी की तरह ही हनुमान जी के भी अनगिनत भक्त हैं. उन्हें मानने वालों की गणना करना असंभव है.
ऐसी मान्यता है कि भगवान हनुमान त्रेतायुग से लेकर आने वाले तीन युगों तक जीवित रहे हैं. यानि कि आज के कलयुग में भी वे जीवित हैं, लेकिन कहां हैं यह कोई नहीं जानता.
त्रेतायुग में श्रीराम के साथ और द्वापर युग में महाभारत के दौरान भीम से मिलना, यह दर्शाता है कि हनुमान जी दो युगों तक हमारे बीच रहे हैं. लेकिन ये वे महारथी हैं जो कलयुग में भी अपना स्थान बनाए हुए हैं.

हनुमान जी का शक्तिशाली ”बाहुक पाठ”, तुरंत दूर होती है हर समस्या !