शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

शिवभक्ति को समर्पित है सावन माह


सावन माह में कांवड़ मेला शुरू होने जा रहा है, यानी आशुतोष की ससुराल में शिव की भक्ति की धुन रमने जा रही है। सावन माह में कई और भी व्रत-त्योहार आते हैं, जिनका अपना अलग-अलग महत्व है। कृष्ण पक्ष में ही दस व्रत-त्योहारों का योग बन रहा है।
साल का सावन माह शिव भक्ति व पूजा के नाम होता है। शिवालयों में शिवभक्तों की आस्था का सैलाब उमड़ता है और शिवलिंग का जलाभिषेक कर मनौतियां मांगी जाती हैं। दूध, घृत, पंचामृत भी शिवालयों में चढ़ाया जाता है। शिवभक्त धतूरा व बेलपत्र चढ़ाकर भी मनौतियां मांगते हैं। शिवभक्त ओम नम: शिवाय पंक्षाक्षर का जाप कर शिव की पूजा करते हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार 27 जुलाई मंगलवार को प्रात: 9 बजकर आठ मिनट से सावन माह शुरू हो जाएगा। खास बात यह कि इस सावन माह में पांच सोमवार आ रहे हैं। शिव पुराण के अनुसार सावन माह के सोमवार को शिवालय में बेलपत्र चढ़ाने से एक करोड़ कन्यादान के बराबर फल मिलता है। सावन माह शुरू होते ही 29 जुलाई गुरुवार को श्री गणेश चतुर्थी व्रत आ रहा है। इसमें सुहागन पुत्र प्राप्ति के लिए गणेश भगवान का व्रत रखती हैं, जबकि 3 अगस्त सोमवार को कालाष्टमी व्रत है। इसमें मां दुर्गा का व्रत लिया जाता है। 4 अगस्त को कौमारी नवमी पूजा का योग है। इस दिन कन्याओं का पूजन किया जाता है। इसके बाद 7 अगस्त को प्रदोष व्रत है। इसमें शिव-पार्वती का व्रत किया जाता है। 8 अगस्त को मास शिवरात्रि व्रत है। यह व्रत हर माह आता है, लेकिन सावन माह में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। हर महीने का यह दिन शिव पूजा के नाम रहता है। 9 अगस्त को पितृकार्य अमावस्या आ रही है, जबकि 10 अगस्त को देवकार्य अमावस्या भी है। इसके अलावा शुक्ल पक्ष की शुरुआत में ही 14 अगस्त को नाग पंचमी है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विष्णु भगवान ने कल्कि अवतार लिया था, जिसे सत्यनारायण जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इसी दिन अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ होगा।

2 टिप्‍पणियां:

Prabhu Darshan ने कहा…
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Prabhu Darshan ने कहा…

एक परम दिव्य तत्व के तीन भाग ( ब्र्ह्मा, विष्णु, शिव ) का अंतिम भाग है भगवान शिव. महादेव शिव के गुण एवं उनकी अद्भुत महिमा अपरम्पार एवं अनन्त है. यदि हम सरल शब्दों में कहे तो भगवान शिव अव्यक्त एवं अनन्त स्वरूप के देवता है तथा उनके गुणों एवं महिमा की गिनती हम साधारण मनुष्यो के बस की बात नहीं .
स्वयं शास्त्रों में लिखी एक बात भगवान शिव के गुणों की अनन्ता को प्रदर्शित करती है. जिसके अनुसार यदि पर्वत जितना काजल लेकर, समुद्र रूपी दवात में रखे तथा कल्पवृक्ष को कलम बनाकर पृथ्वी रूपी कागज में स्वयं ज्ञान की देवी सरस्वती शिव के गुणों को लिखना प्रारम्भ करें तो भी भगवान शिव के गुणों एवं उनकी महिमा की गाथा का अंत नहीं होगा.

महादेव शिव के ऐसे ही गुणगान से जुडा उनका एक नाम बहुत ही अद्भुत एवं प्रभावकारी माना जाता है. यह नाम विशेषकर सावन के महीने भगवान शिव के हर भक्त के मुंह में होता है. भगवान शिव का वह पावन नाम है ”हर”. भगवान शिव के सभी भक्त हर हर महदेव का जयकार करते है.

बहुत ही महत्वपूर्ण है भगवान शिव से जुड़े यह सात रहस्य !