शनिवार, 29 अगस्त 2009

शिवजी बिहाने चले

‘शिवजी बिहाने चले, पालिकी सजायके, भभूती लगायके।
हो जब शिव बाबा मंडवा गइले, होला मंगलाचार हो।
बाबा पंडित वेद विचारे, होला मंगलाचार हो।
बाबा पंडित वेद विचारे, होला बुधवा चार हो।
वजरवटी की लगी झालरी, नागिन का अधिकार हो।
बिच मंडलवा में नाऊन आइली, कर ठगनन बडियार हो।
देखो नागिन दिहलिन बिदाई, नाउन जिव लै चली पराई।
सब हंस लागै, लाल देवता खखायके।
शिवजी बिहाने चलै, पालको सजायके, भभूती लगायके’।

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