शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

पार्वती तुकेश्वर महादेव मंदिर

देवाधिदेव महादेव को सबसे ज्यादा प्रिय पार्वतीजी के मंदिरों की संख्या देशभर में नहीं के बराबर है, मगर इंदौर में केशरबाग रोड पर एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है। इसका नाम केशरबाग शिव मंदिर उत्कीर्ण है, परंतु इस स्थान का वास्तविक नाम पार्वती तुकेश्वर महादेव मंदिर है। इस मंदिर के बारे में शहर में बहुत कम लोगों को जानकारी है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत है माँ पार्वती की बेहद सुंदर प्रतिमा, जिसके एक हाथ में कलश है और गोद में स्तनपान कर रहे बाल गणेशजी हैं जबकि ठीक सामने शिवजी लिंगस्वरूप में विद्यमान है। इस मंदिर की स्थापना कब हुई, इसका कोई प्रामाणिक इतिहास उपलब्ध नहीं है, लेकिन वहाँ पर लगे पट्ट की मानें तो करीब 400 वर्ष पहले इसका निर्माण हुआ था। बाद में लोकमाता देवी अहिल्याबाई ने इसका जीर्णोद्धार भी करवाया।

ऐतिहासिक साक्ष्य के मुताबिक 1810 से 1840 के बीच होलकर वंश की केशरबाई ने इसका निर्माण करवाया। यह मंदिर पूर्वमुखी है। पहले इसका बाहरी प्रवेशद्वार भी पूर्वमुखी ही था, जो अब सड़क निर्माण की वजह से पश्चिम मुखी हो गया है। मंदिर की ऊँचाई 75 फुट और चौड़ाई करीब 30 फुट है। पूरा मंदिर मराठा, राजपूत और आंशिक रूप से मुगल शैली में बनकर तैयार हुआ है। इसकी एक और सबसे बड़ी खासियत माँ पार्वती की अत्यंत सुंदर प्रतिमा है, जो करीब दो फुट ऊँची है। प्रतिमा वास्तव में इतनी सुंदर है, जैसे लगता है कि अभी बोल पड़ेगी।

श्वेत संगमरमर से बनी इस प्रतिमा का भाव यह है कि इसमें पुत्र व पति की सेवा का एक साथ ध्यान रखा जा रहा है। मंदिर के ही ठीक सामने कमलाकार प्राचीन फव्वारा भी है। वर्तमान में मंदिर का कुल क्षेत्रफल 150 गुणा 100 वर्गफुट ही रह गया है। हर वर्ष श्रावण मास में विद्वान पंडितों के सान्निध्य में अभिषेक, श्रृंगार, पूजा-अर्चना आदि अनुष्ठान कराए जाते हैं।

मंदिर का गर्भगृह काफी अंदर होने के बावजूद सूर्यनारायण की पहली किरण माँ पार्वती की प्रतिमा पर ही पड़ती है। मंदिर की सुंदरता में चार चाँद लगाता है यहाँ का पीपल वृक्ष। समीप ही प्राचीन बावड़ी भी है जिसे सूखते हुए आज तक किसी ने नहीं देखा। भीषण गर्मी के मौसम में भी यह लबालब रहती है।

पार्वती मंदिर से ही लगे हुए दो और मंदिर भी हैं। एक है राम मंदिर और दूसरा है हनुमान मंदिर। प्राचीन राम मंदिर से ही एक सुरंग भूगर्भ से ही दोनों मंदिरों को जोड़ती है। यह बावड़ी के अंदर भी खुलती है। बताते हैं कि किसी समय यह सुरंग लालबाग मंदिर तक जाती थी। राम मंदिर के ठीक नीचे एक तहखाना भी है। मौजूदा समय में यह स्थल देवी अहिल्याबाई होलकर खासगी ट्रस्ट में शामिल है।

होलकर शासकों द्वारा प्रसिद्ध मराठी संत नाना महाराज तराणेकर को यहाँ का परंपरागत पुजारी नियुक्ति पत्र दिया गया था। इस आशय की सनद भी उन्हें प्रदान की गई थी, तभी से उनका परिवार यहाँ सेवारत है। मंदिर के पुजारी बाड़ा महाराज (विजय कामले) हैं।

1 टिप्पणी:

Prabhu Darshan ने कहा…

एक परम दिव्य तत्व के तीन भाग ( ब्र्ह्मा, विष्णु, शिव ) का अंतिम भाग है भगवान शिव. महादेव शिव के गुण एवं उनकी अद्भुत महिमा अपरम्पार एवं अनन्त है. यदि हम सरल शब्दों में कहे तो भगवान शिव अव्यक्त एवं अनन्त स्वरूप के देवता है तथा उनके गुणों एवं महिमा की गिनती हम साधारण मनुष्यो के बस की बात नहीं .
स्वयं शास्त्रों में लिखी एक बात भगवान शिव के गुणों की अनन्ता को प्रदर्शित करती है. जिसके अनुसार यदि पर्वत जितना काजल लेकर, समुद्र रूपी दवात में रखे तथा कल्पवृक्ष को कलम बनाकर पृथ्वी रूपी कागज में स्वयं ज्ञान की देवी सरस्वती शिव के गुणों को लिखना प्रारम्भ करें तो भी भगवान शिव के गुणों एवं उनकी महिमा की गाथा का अंत नहीं होगा.

महादेव शिव के ऐसे ही गुणगान से जुडा उनका एक नाम बहुत ही अद्भुत एवं प्रभावकारी माना जाता है. यह नाम विशेषकर सावन के महीने भगवान शिव के हर भक्त के मुंह में होता है. भगवान शिव का वह पावन नाम है ”हर”. भगवान शिव के सभी भक्त हर हर महदेव का जयकार करते है.

बहुत ही महत्वपूर्ण है भगवान शिव से जुड़े यह सात रहस्य !